नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में हिंसक प्रदर्शन क्यों

अभी हाल ही में सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल पास कराया है। उसको पढ़े बिना-जाने बिना उसका विरोध करना कितना उचित है। यह समझने एंव देखने की बात है। विराध करना सबका अधिकार है। उसके लिये कोई इनकार नही करता लेकिन विरोध के नाम पर पूरे देश में खास कर दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश में हिंसा पर उतरकर भीड़ द्वारा निजि सम्पतियो एंव सरकारी सम्पतियो में तोड़फोड़ करना और उनको आग के हवाले करना कितना उचित है। विरोध शांतिपूर्ण भी किया जा सकता था लेकिन नही किया गया। आखिर क्यो - क्योकि अन्य विपक्षी राजनेतिक पार्टीया यही सोचती है और चाहती है कि किसी भी तरह से मोदी सरकार एंव भारतीय जनता पाटी की सरकार केन्द्र की सत्ता में ना रहे। उनका पूरा जोर मोदी की सरकार का मोदी का विरोध करना ही एक मात्र उद्देश्य है इसके लिये चाहे उनको पूरे देश में आग ही क्यो ना लगानी पड़े और अपने उद्देश्यो की पूर्ति हेतु ये कांग्रेस-समाजवादी पार्टी वामदल एंव अन्य पार्टी नेता इस आगजनी एंव हिंसा का छिपे तौर पर समर्थन कर रहे है।


इससे क्या हासिल होगा क्या इनको देश को बदनाम करके देश में आग लगाके देश की सम्पति को नुकसान पहुँचाकर सत्ता मिल जायेगी। शायद कभी नही। इससे तो इनको नुकसान ही होगा। जनता सब देख रही हैसब समझ रही है। मौका आने पर इनको जनता इसका जबाव दे देगी।


सरकार और सभी नेता कह रहे है कि इस कानून से भारत के मुसलमानो को डरने की जरूरत नही है। उनका इस कानून से कोई लेना देना नही है। फिर भी कुछ पार्टीयो के नेतागण इनको इसके विरोध में भड़काने में कामयाब हो गये। मुसलमान इनके द्वारा बुने गये जाल में फंस कर अपना तथा अपने देश का नुकसान कर रहे-अपनी छवि को खराब कर रहे है। अपने धर्म को बदनाम कर रहे है। इस हिंसा प्रदर्शन-तोडफोड़ से इन मुसलमानो को क्या हासिल होगा। पता नही ये मुसलमान क्या सोच कर इस हिंसा तथा तोड़फोड़ में शमिल हो गये यह इनकी अज्ञानता का फायदा उठाने में कामयाब हो गये


ये सभी दंगे पूर्व सुनियोजित एक सोची समझी साजिश के तहत किये गये है। इसकी पहले ही पूरी तैयारी की गई है। इसके लिये जुमे की नमाज का दिन तय किया गया। जुमे की नमाज के बाद इमामो के द्वारा शन्ति की अपील करने के बावजूद भी ये हिंसा प्रदर्शन का दौर चला यही दर्शाता है कि इसकी पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी है। हमें ऐसा लगता है कि जुमे में नमाज के बाद होने वाली शन्ति की अपील एक दिखावा थी जो सरकार को बताने एंव दिखाने के लिये थी। परन्तु इसके पीछे यही सच है। कि हम शान्ति की अपील जरूर करेगे लेकिन तुम अपना काम तुरन्त शुरू कर देना यानी हिंसा-तोड़फोड आगजनी आदि। नमाज अदा करने से पहले यह हिंसा यह तोड़फोड़ यह आगजनी क्यो नही हुई क्योकि यदि पहले यह हिंसा आगजनी तोड़फोड़ होती तो इतना बवाल नही होता इतनी तादाद में जनसमूह एक जगह जमा नही होता। नमाज अदा करने के बहाने इनको एक जगह (मस्जिद) में जमा होने का बहाना मिल गया और हिंसा तोड़फोड़ आगजनी को अन्जाम दिया जा सका।


इस विरोध प्रदर्शन की आड़ में से विरोधी दलो के नेता अपनी राजनेतिक रोटिया सेंक रहे है। और आनन्द ले रहे है। ये पार्टी नेतागण खुद इन विरोध प्रदर्शन में शमिल क्यो नही हुये क्योकि उनको पता है कि यदि वो गिरफ्तार हो गये तो उनकी कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ेगे और इसमे उनको सजा भी हो सकती है।


ये मुसलमान जाने अनजाने इस हिंसा विरोध में शमिल होकर अपने आपको मुसीबत में डाल दिया है। इस दौरान जो भी मुस्लिम पुलिस के द्वारा पकड़ा जायेगा उसे कुछ दिन जेल की हवा खानी पड़ेगी और केस अलग से चलेगा जिसमे सालो कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़ेगे सो अलग पैसा खर्च होगा सो अलग। इसके लिये क्या ये नेतागण इनको पैसा देगे या इनको मुकदमे में किसी प्रकार की सहायता करेगे। मैं यही समझता हूँ कि शायद कभी नही जो भी मुसलमान इन चक्करो में एक बार फंस जायेगा तो दुबारा जिन्दगी भर इन धरना प्रदर्शन हिंसा तोड़फोड आगजनी कभी भी शमिल नही होगा। वो इससे तौबा कर लेगा। इन धरना प्रदर्शन हिंसा तोड़फोड़ आगजनी में अनपढ़ गवार जाहिल तबके के लोग अपराधिक तबके लोग ही शमिल हुये। कोई पढ़ा लिखा समझदार तथा व्यापारी भाई इस दंगा फसाद तोड़फोड़ हिंसा तथा आगजनी में शमिल नही हुआ। उन्हें पता है कि इससे कुछ हासिल होने वाला नही है।


दिनांक 19/12/19 के जागरण के अंक में एक जाने माने मुस्लिम लेखक रामिश सिद्दकी ने लिखा है कि अज्ञानता की उपज है यह हिंसक विरोध प्रदर्शन। इस लेख में वो साफ-साफ उन कारणो पर प्रकाश डालते है जिनसे यह आंदोलन खड़ा हुआ।


आज दिनांक 21/12/19 के जागरण के अंक में कृपाशकरे चौबे द्वारा लिखा गया लेख पढ़े तो पता चलेगा कि किस प्रकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अपने धर्म की रक्षा के लिये अपने परिवार की सुरक्षा के अपने भविष्य की सुरक्षा के कारण बांग्लादेश से भागकर भारत भूमि में आकर बस गये है। आज बांग्लादेश ही कही पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान से भागकर आने वाले हिन्दु-जैन सिख बौद्ध ईसाई भारत में शरण लेने को मजबूर है। क्या कभी किसी पार्टी के नेता ने उनको दर्द को समझा है उनके आंसू पोछे है उनसे हमदर्दी दिखाई है शायद कभी नही क्योकि वो उनका वोट बैंक है ही नही। ऐसा ये नेतागण सोचते है। इनको केवल उन मुसलमानो की चिन्ता है जिनके दम पर ये राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिये हमेशा तैयार रहते है।


राजनीति कैसी कुत्ती चीज है। जिसके लिये ये समाज को बांटकर-देश में आग लगाकर देश को बदनाम करके- भारत की एकता अखण्डता को तहस नहस करके सत्ता प्राप्त करना चाहते है। इनकी इस चाहत में नरेन्द्र मोदी सरकार तथा भारतीय जनता पार्टी रोड़ा बनकर खड़ी हो गई है इस रोडा रूपी दीवार को गिराकर दुबारा केन्द्र की सत्ता पर पर काबिज होकर देश को लूटना-खसौटना चाहते है इससे आगे कुछ नही।


क्या ये नेतागण क्या मुस्लिम समाज यह बताने का कष्ट करेगा कि पाकिस्तान-बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान से अपनी जान माल को बचाकर भागने वाले में अल्पसंख्यक दुनिया कौन से देश में जायेगे। इनके लिये सिर्फ और सिर्फ भारत ही ऐसा अपना देश है जहां इनको पनाह मिल सकती है। इनके परिवार को सुरक्षा मिल सकती है। इनका धर्म बच सकता है। इनके बहु बेटियों को इज्जत महफूज रह सकती है।


रहा सवाल मुसलमान का वह तो मुसलमान ही है। मुसलमान को मुसलमान से क्या दुश्मनी इनका धर्म एक इनका खानपान एक इनका अल्ला एक इनकी मस्जिदे एक जहां ये अपने अल्ला को याद करते है। ये उन मुल्को को छोड़कर दुनिया के तमाम मुस्लिम देश में जाकर शरण ले सकते है। वहां अपना कारोबार कर सकते है। रह सकते है। परन्तु हिन्दु नही।


एक बात और बताता हूँ कि मुसलमान हिन्दु का काफर कहता है और इनका इन काफिरो का खात्मा करना ही एक मात्र उद्देश्य होता है। जबकि इनके अल्लामियां ने ऐसा कोई सन्देश कोई पैगाम नही दिया। इन मुल्ला मौलवियो ने इमामो ने हाफिजी ने इनको गैर मुस्लिम के खिलाफ इनके दिमाग में जहर भर दिया है। उस जहर का ही असर है यह हिंसा तोड़फोड़ आगजनी आदि।


दूसरी बात अहम यह है कि सौ हिन्दुओ के बीच एक मुसलमान आराम से रह सकता है। लेकिन दस बीस मुसलमानो के बीच एक हिन्दु या हिन्दु परिवार नहीं रह सकता है। क्योकि इनके खानपान में विचारो में अन्तर होने के कारण। ये सभ्य भारत का आम हिन्दु-सिख-जैन बौद्ध ईसाई जानता है कि इनकी मानसिकता और मुस्लिमी के लिये कैसी है।


यदि इन दंगा फसाद-तोड़फोड़-आगजनी में रोक नही लगाई जा सकी तो देश का समाज को बांटने की कोई नहीं रोक सकता है। लेकिन भारत सरकार-यूपी सरकार एंव अन्य मौजूद सरकार ऐसा कभी भी नही होने देगी। इसी आशा और विश्वास के साथ हम भविष्य में देख रहे है।


 


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