बलात्कारियों का हो एनकांउन्टर - ऐसा बने कानून

पिछले दिनो हैदराबाद में एक पशु चिकित्सक से बलात्कार करने के बाद उसको जिन्दा जलाने वाले चारो आरोपियो को पुलिस ने एनकाउन्टर करके मार गिराया। इन एनकाउन्टर पर समुचे देश में खुशी की लहर है। एनकाउन्टर करने वाले पुलिस बल पर लोगो ने फूलो की वर्षा की। देश के कोने-कोने से महिलाओं के द्वारा इस घटना का स्वागत किया जा रहा है। लेकिन कुछ नेताओं खास कर कांग्रेस के नेता पी. चिदंबरम एंव अन्य नेता इस पर इस काण्ड की जांच की मांग उठा रहे है। इसके साथ ही राष्ट्रीय मानवधि कार आयोग भी इसके विरोध में आवाज उठा रहा है।


जो लोग जो नेता तथा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष से एक सवाल यही है कि क्या उन अपराधियों की आरती उतारी जाती। कि आओ आपने अच्छा काम किया है। हम तुम्हे सम्मानित करेगे क्योकि देश में ऐस कितने ही बलात्कार के केस होते है जिसमे अपराधी पीड़िता को जलाकर मार चुके है। लेकिन उनका कुछ नही हो सका। यदि वो पकड़े भी जाते है तो सालो उनके खिलाफ मुकदमा चलता रहता है। लेकिन इन्साफ नही मिलता। दिल्ली में 2012 में हुआ निर्भया कान्ड को आज भी याद किया जाता है उस काण्ड के गुनहगार आज भी खुला घूम रहे है यदि जेल में तो है परन्तु जिन्दा है। उनको अब तक फांसी की सजा नही दी जा सकी है आखिर क्यो :- ऐसे हरामजादो को तो शहर के चौराहो पर खड़ा करके तुरन्त गोली मार देनी चाहिए। ताकि अन्य दूसरो को गुनाह करने से पहले सौ बार सोचना पड़े कि यदि मैने ऐसा किया तो मुझे फांसी हो जायेगी। उनमें डर पैदा होगा। लेकिन शायद इनका समर्थन करने वाले नेता तथा मानवाधिकार वाले की बहने बेटी के साथ यदि ऐसा होता तो शायद ये इस प्रकार का बयान जारी नही करते। तब ये भी इसी प्रकार चीख पुकारकर हत्यारो को फांसी देने की बकालत करते दूसरो का दर्द दूसरो की पीड़ा ये घटिया मानसिकता वाले नेता - अफसर मानवाधिकार अध्यक्ष क्या जाने। इनको तो हर घटना के विरोध में बोलने की बीमारी है। इस बीमारी का कोई इलाज नही है। 


लचर कानून प्रतिक्रिया-लम्बी खिचती कानून प्रतिक्रिया के कारण इनको मिलने वाली जमानत के कारण इन जैसे अपराधियों के हौसेले बुलंद है। इनको कानून का कोई डर नहीं है और ना ही पुलिस का। इनको पता है। कि लम्बा चलता मुकदमा हमारे खिलाफ केस को कमजोर करता है। गवाहों को धमकाया जाता है। वैसे का प्रलोभन दिया जाता है। तब भी वो नही मानता तो उसकी भी हत्या कर दी जाती है। ना ही होगा गवाह और ना ही हमे सजा मिलेगी इसी मानसिकता के चलते सब हत्याये-बलात्कार होते है। 


इन बलात्कारो का होना मेन कारण है। मोबाइल-जी हाँ मोबाइल। जब से देश में मोबाइल का उपयोग अधिक से अधिक होने लगा है तबसे ही ऐसी घटनाएं होने लगी है। क्योकि मोबाइल में हर प्रकार का अश्लीलता भरे गाने वीडियो देखने को मिलते है साथ सैक्सी फिल्मे भी देखने को मिलती है जिससे आदमी का मन-दिमग औरत के साथ सैक्स करने को आतुर रहता है। औरत को भोग की वस्तु समझता है। जब तक इसक प्रकार मानसिकता आम लोगो के दिमाग में बनी रहेगी तब तक इस प्रकार बलात्कार के काण्ड होते रहेगे अपने गुनाहो को छिपाने के लिये लड़कियो को जिन्दा जलाने का भी काम होता रहेगा। मोबाइल संस्कृति ने लोगो की विकृत मानसिकता ने जकड़ लिया है। जब तक इस मानसिकता से मोबाइल से छुटकारा नही मिलता तब तक यह सिलसिला चलता रहेगा। निकट भविष्य में भी इससे निजात (छुटकारा) मिलना मुश्किल है।


इस प्रकार के काण्ड का समर्थन करके ये नेतागण-मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष-सदस्य अपनी घटिया सोच का सबूत देते है। शायद इससे यह अपनी राजनीति भी करने को बाध्य होते है।


हम इस लेख के द्वारा इस प्रकार का घृणित कार्य करने चालो को एनकाउन्टर में मारने का पुरजोर समर्थन करते है और यदि भविष्य में जो भी लड़की या किसी औरत के साथ बलात्कार करे तो चौराहे पर खड़ा करके उसकां अंग को काटकर फैक देना चाहिए या उसका सरेआम एनकाउन्टर कर देना चाहिए।


सरकार को चाहिए देश में ऐसा-कानून बनाये जिससे बलात्कार करने वाला या उसको जलाकर मारने वाले इस प्रकार का काण्ड करने से पहले सौ बार सोचना पड़े। क्या हमारे देश के के कर्णधर नेतागण खासकर विरोधी पाटी के नेतागण इस प्रकार का कड़ कानून बनाने में देश की सरकार का समशन करेगे या सहयोग करेगे। शायद ऐसा हो सके इसी आशा और विश्वास के संदिग्ध अपराधियों की क्षमा याचिका क्यों?



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